राजधानी दिल्ली में पानी का संकट अब सिर्फ परेशानी नहीं, बल्कि जनआक्रोश का विस्फोट बन चुका है। त्रिलोकपुरी के वार्ड 192 में आज जो तस्वीर सामने आई, उसने सिस्टम की नाकामी को खुलकर बेनकाब कर दिया। सैकड़ों स्थानीय लोग और कार्यकर्ता एकजुट होकर विधायक कार्यालय के बाहर डट गए और जोरदार घेराव कर दिया।
गुस्से से भरे प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में कहा—अब पानी के लिए तरसना मंजूर नहीं। जिस शहर को देश की राजधानी कहा जाता है, वहां अगर लोगों को एक-एक बूंद के लिए संघर्ष करना पड़े, तो ये सीधे-सीधे व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।
इलाके के लोगों ने बताया कि हालात इतने खराब हैं कि रोजमर्रा की जिंदगी ठप पड़ गई है। सुबह से लेकर देर रात तक पानी के इंतजार में समय निकल जाता है। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं—कभी लंबी लाइनों में खड़े होकर, तो कभी दूर-दराज इलाकों से पानी ढोकर अपनी जरूरतें पूरी करनी पड़ रही हैं।
प्रदर्शन के दौरान माहौल पूरी तरह उग्र और भावनात्मक नजर आया। हर तरफ से एक ही आवाज गूंजती रही—
“पानी दो, परेशानी नहीं!” 💧
“पानी पर राजनीति बंद करो!”
लोगों ने सरकार को सीधी चेतावनी दी है—अगर जल्द ही वार्ड 192 के हर घर तक पर्याप्त और नियमित पानी की सप्लाई सुनिश्चित नहीं की गई, तो ये आंदोलन और बड़ा रूप लेगा और सड़कों से लेकर हर स्तर तक इसकी गूंज सुनाई देगी।
क्या राजधानी के लोगों को अब अपने हक के पानी के लिए भी आंदोलन करना पड़ेगा?
जनता का अल्टीमेटम:
वादे नहीं, अब सिर्फ पानी चाहिए… और वो भी बिना देरी के!

